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स्थापना - पेशवाओं द्वारा 1731 में मालवा को सिंधिया, होलकर और पवार के मध्य बांट दिया जाता है ।
# राणोजी सिंधिया
• 1731 में मालवा का एक भाग सिंधिया को मिला जिस पर राणाेजी सिंधिया शासन कर रहे थे उन्होंने सिंधिया राजवंश की स्थापना की। राणोजी ने उज्जैन को अपनी राजधानी बनाया।
• राणोजी महाराष्ट्र राज्य के कन्हेरखेड़ा (सतारा जिला) से संबंधित थे 
• राणेजी सिंधिया के पश्चात उनके पुत्र महादजी सिंधिया शासक बने।

# महादजी सिंधिया (1761-1794)
• महादजी सिंधिया को सिंधिया वंश के वास्तविक संस्थापक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने अपने पिता द्वारा प्राप्त साम्राज्य का अत्यधिक विस्तार किया महादजी सिंधिया के शासनकाल में सिंधिया रियासत में पंजाब से लेकर गंगा-यमुना के दोआब तक का क्षेत्र सम्मिलित था।
महादजी द्वारा अंग्रेजों को अनेक युद्धों में पराजित किया गया इन्होंने राजपूतों को भी पराजित किया।
मुगल बादशाह शाहआलम को महादजी ने संरक्षण प्रदान किया। शाहआलम द्वारा महादजी सिंधिया को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
1793 ईस्वी में लाखेरी के युद्ध में महादजी सिंधिया द्वारा तुकोजीराव होलकर को पराजित किया गया किंतु उन्होंने इसे अपने विजय के रूप में नहीं देखा।  उन्होंने कहा कि अपने बांधवों से युद्ध में जितना विजय नहीं माना जा सकता उन्होंने विजय दिवस की जगह "शोक  दिवस" मनाने का निर्णय लिया जो इनकी महानता का सूचक है।
• महादजी सिंधिया इस वंश के प्रतापी शासक के रूप में जाने जाते हैं। महादजी वीर योद्धा और कुशल प्रशासक थे । इन्होंने 1765 में लोकेंद्र सिंह जाट से ग्वालियर का किला छीना।
इन्हें ग्वालियर राज्य के संस्थापक के रूप में जाना जाता है।


# दौलतराव सिंधिया
महादजी सिंधिया के उत्तराधिकारी के रूप में दौलतराव सिंधिया शासक बने।
 दौलतराव ने अंग्रेजों के साथ अनेक युद्ध किए किंतु किसी में भी उन्हें विजय प्राप्त नहीं हुई अंततः उन्होंने सन 1803 में अंग्रेजों से सुर्जीअर्जन की संधि की। इस संधि के तहत दौलतराव द्वारा अंग्रेजों को गंगा-यमुना  दोआब का क्षेत्र देना पड़ा।
दौलतराव सिंधिया ने 1810 में उज्जैन के स्थान पर ग्वालियर को अपनी राजधानी बनाया।
• 1818 ई. में इन्होंने अंग्रेजों से सहायक संधि की।
दौलतराव की कोई संतान नहीं थी इसलिए दौलतराव और उनकी पत्नी बायजाबाई ने जनकोजी को गोद लिया।
दौलतराव की मृत्यु के पश्चात जनकोजी शासक बने।

# जनकोजी
दौलतराव की मृत्यु के पश्चात उनके अल्प वयस्क पुत्र    जनकोजी राजा बने । जनकोजी अभी अल्पवयस्क थे    इसलिए बायजाबाई ने उनकी संरक्षिका के रूप में   शासन किया।
• बायजाबाई ने अनेक महत्वपूर्ण कार्य किए-
(1) बायजाबाई द्वारा बापूजी रघुनाथ को अपना प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया।
(2) इन्होंने  आत्माराम पांडे को फडणवीस नियुक्त किया। 
(3) कर्नल अबेक की सहायता से सेना का पुनर्गठन किया तथा ठगों को समाप्त करने में अंग्रेजों की सहायता की।
(4) इनके शासनकाल  में कुछ लुटेरे व्यक्तियों द्वारा जबरन प्रजा से कर वसूल किया जाता था जिसे मुक्ता पद्धति कहा जाता था इन्होंने मुक्ता पद्धति को समाप्त कर प्रजा की रक्षा की।
जनकोजी के वयस्क होने के पश्चात अंग्रेजों द्वारा बायजाबाई को शाजापुर भेजकर जन को जी को राज्य का शासक नियुक्त किया गया।
जनकोजी भी नि:संतान थे तो अंग्रेजो ने अपने कूटनीति चाल चलते हुए युद्ध में जनकोजी की हत्या कर साम्राज्य हड़पने की योजना बनाई किंतु जनकोजी के विश्वासपात्र सरदार द्वारा एक बालक भागीरथराव को जनकोजी का उत्तराधिकारी घोषित कर दिया गया।

# जयाजीराव (भागीरथराव)
जनकोजी की मृत्यु के पश्चात उनका दत्तक पुत्र भागीरथराव, जयाजीराव के नाम से शासक बना।
जयाजीराव अभी अल्प वयस्क थे इसलिए ताराबाई ने इनकी संरक्षिका के रूप में कुछ दिनों तक शासन किया।
जयाजीराव के समय ही 1857 की क्रांति हुई।

1857 की क्रांति में जयाजीराव का महत्त्व
1857 की क्रांति ग्वालियर में मुरार छावनी से प्रारंभ हुई । लक्ष्मीबाई, तात्या टोपे और नाना साहेब द्वारा म.प्र. में 1857 की क्रांति का नेतृत्व किया गया। इन्होंने ग्वालियर के राजा जयाजीराव को एक पत्र लिखकर उनसे अपनी सहायता देने के लिए अनुरोध किया। जयाजीराव दुविधा में थे कि 1857 की क्रांति में भाग लेना चाहिए या नहीं इन्होंने अपने प्रमुख सलाहकारों  मैक और दिवाकर से सलाह माँगी । दिवाकर और मैक द्वारा इन्हें क्रांति में भाग न लेने का सलाह दी गई इसलिए इन्होंने क्रांति में भाग नहीं लिया फलतः तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई द्वारा ग्वालियर के किले पर आक्रमण कर ग्वालियर के किले को जीत लिया गया दिवाकर और जयाजीराव बचकर आगरा चले गए।
• मृत्यु-1886 ई.में जयाजीराव की मृत्यु के  पश्चात उनका पुत्र माधोराव शासक बना।

# माधोराव 
जयाजीराव के पश्चात उनका पुत्र माधोराव शासक बना।
• माधोराव अभी अल्पव्यस्क थे । इसलिए अंग्रेजों द्वारा 1894 तक के लिए "काउंसिल ऑफ माधवराव शिंदे" बनाई गई इसके द्वारा अनेक कार्य किए गए।

काउंसिल ऑफ माधोराव शिंदे के कार्य -
(1) काउंसिल द्वारा न्यायपालिका का पुनर्गठन किया गया।
(2) शिक्षा के प्रचार-प्रसार हेतु कन्याविद्यालय एवं कन्या महाविद्यालय की स्थापना की गई।
(3) संगीत एवं कला को प्रोत्साहन एवं संरक्षण प्रदान किया गया
(4) कंठ संगीत वाद्य संगीत से संबंधित अनेक कलाकारों हाफिज खान एवं सितारिये मंसूरकर को आश्रय प्रदान किया।

#जीवाजीरव
जीवाजीराव इस वंश के अंतिम शासक थे। इन्होंने 26 जून 1916 से 16 जुलाई 1961 तक शासन किया तत्पश्चात ग्वालियर रियासत का भारत में विलय हो गया।




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