पंजाब मेल हत्याकांड ,मध्यप्रदेश

23 जुलाई 1931 की रात को दिल्ली से मुंबई जा रही पंजाब मेल के प्रथम श्रेणी के डिब्बे में अंग्रेज अधिकारी हेक्सट , शीहन और उनका शिकारी कुत्ता सवार थे।  

 म. प्र. के प्रमुख क्रांतिकारी के रूप में देश को आजादी दिलाने के लिए दमोह के वीर यशवंत सिंह ,भुसावल के देव नारायण तिवारी( रेलवे कर्मचारी) और उनके मित्र दलपत राव ने अंग्रेज अधिकारियों से रायफल और अन्य सामान लूटने की योजना बनाई।

तीनों सेनानियों में ट्रेन के डिब्बे में पहुंचकर अपनी मातृभूमि के लिए बदला लेने के उद्देश्य ट्रेन की जंजीर खींचकर ट्रेन को रोक लिया और ट्रेन में चढ़कर इन अंग्रेज अधिकारियों पर हमला करके अंग्रेज अधिकारी हेक्सट की हत्या कर दी किंतु शीहन नामक अधिकारी बच निकला।
तीनों क्रांतिकारी ट्रेन से उतरकर जंगल में छिप गए तथा बचकर भागने में सफल रहे किंतु गहन छानबीन के बाद पुलिस द्वारा तीनों क्रांतिकारियों को पकड़ लिया गया और खंडवा की अदालत में उन पर मुकदमा चलाया गया।

 यशवंत सिंह और देव नारायण तिवारी को जबलपुर जेल में फांसी दे दी गई तथा दलपततराव को काले- पानी की सजा देकर अंडमान भेज दिया गया।

इस संपूर्ण घटनाओं को पंजाब मेल हत्याकांड के नाम से जाना जाता है क्योंकि यह घटना दिल्ली से मुंबई जा रही पंजाब मेल नामक ट्रेन में हुई थी।

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